मणिपुर में पुलिस से झड़प में 53 विद्यार्थी घायल:2 विद्यार्थियों की हत्या के खिलाफ ‘

  • मणिपुर में पुलिस से झड़प में 53 विद्यार्थी घायल:2 विद्यार्थियों की हत्या के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे

मंगलवार 26 सितंबर को मणिपुर के इंफाल शहर में सुरक्षाबलों और विद्यार्थियों के बीच झड़प से मोबाइल इंटरनेट फिर से बंद हो गया। 54 विद्यार्थी, एक शिक्षक भी घायल हुए। विद्यार्थी जुलाई से लापता दो विद्यार्थियों की हत्या के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। प्रत्येक घायल व्यक्ति को निकटतम अस्पताल में भर्ती कराया गया है। राज्य सरकार ने अगले पांच दिनों के लिए मोबाइल इंटरनेट को फिर से बंद कर दिया है।

23 सितंबर को राज्य में मोबाइल इंटरनेट से प्रतिबंध हटने के बाद दो विद्यार्थियों के शवों की तस्वीर सामने आई, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। दोनों की शरीर जमीन पर पड़ी हुई दिखती है। लड़के का सिर भी कटा हुआ है।

दोनों शवों को अभी तक नहीं मिला है। जुलाई में एक दुकान में लगे CCTV कैमरे में दोनों विद्यार्थी दिखाई दिए, लेकिन उसके बाद से उनका पता नहीं चला है। वहीं, राज्य सरकार ने 27 और 29 सितंबर को सभी सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया है।
मामले से जुड़े दो चित्र सामने आए हैं..।

पहली तस्वीर में दो विद्यार्थी, 17 वर्षीय हिजाम लिनथोइंगंबी और 20 वर्षीय फिजाम हेमजीत, बैठे हुए दिखाई देते हैं। तस्वीर में छात्रा सफेद टी-शर्ट पहने हुए है, जबकि हेमजीत एक चेक शर्ट पहने हुए है और बैकपैक पकड़े हुए है। दो बंदूकधारी भी उनके पीछे चल रहे हैं।

दूसरा चित्र- इस चित्र में दोनों विद्यार्थियों के शव झाड़ियों के बीच पड़े हुए हैं। यह तस्वीर मणिपुर के किस क्षेत्र की है, यह अभी भी स्पष्ट नहीं है। पुलिस और जांच एजेंसियां शव खोजने का प्रयास कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने दैनिक भास्कर को बताया कि मणिपुर सरकार ने कहा कि जो भी दोषी हैं, उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, CBI मामले की जांच कर रहा है। सुरक्षा बलों ने भी अपराधियों को पकड़ने की कोशिश की है। लोगों से अपील की गई है कि मामले में शांत रहें और जांच एजेंसियों को काम करने दें।

वहीं, २४ विधायकों ने गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र भेजा है, जिसमें उन्होंने CBI से दोनों विद्यार्थियों की हत्या के आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने की अपील की है।

प्रियंका ने कहा कि केंद्र को अपनी अकर्मण्यता पर शर्म आनी चाहिए।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि मणिपुर में जातीय हिंसा का सबसे कमजोर शिकार बच्चे हैं। हम उनकी रक्षा करने के लिए हर संभव प्रयास करना हमारी जिम्मेदारी है। मणिपुर में हो रहे अपराध शब्दों से परे हैं, लेकिन राज्य में अपराध निरंतर हो रहे हैं। केंद्र को अपनी अकर्मण्यता पर गुस्सा आना चाहिए।

19 जुलाई को महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाने का वीडियो वायरल हुआ था, लेकिन 4 मई को थोउबाल जिले में दो महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाने की घटना हुई थी। 19 जुलाई को इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में कुछ लोग दो महिलाओं को निर्वस्त्र करके ले गए और उनसे अश्लील व्यवहार किए।

एक पीड़ित महिला के पति ने बताया कि गांव पर हजारों लोगों की भीड़ ने हमला किया था। मैं भीड़ से अपनी पत्नी और आसपास के लोगों को बचाने में असफल रहा। हमें पुलिस भी सुरक्षा नहीं दी। तीन घंटे तक भीड़ ने हिंसा करती रही। किसी तरह मेरी पत्नी ने एक गांव में पनाह ली।”

वीडियो में दिखने वाली दूसरी महिला की मां ने कहा, “अब हम कभी अपने गांव नहीं लौटेंगे।” वहां मेरे छोटे लड़के को गोली मारकर मार डाला गया, वहां मेरी बेटी शर्मिंदा हो गई। यह सब मेरे लिए खत्म हो गया है।अब तक मणिपुर में जातीय हिंसा में 175 की मौत, 1100 घायल 1100 से अधिक लोग घायल हो गए हैं। इतना ही नहीं, 5172 आगजनी के मामले सामने आए, जिनमें 4786 घरों और 386 धार्मिक स्थानों को जला दिया गया था।

हिंसा के बाद मणिपुर में अब तक 65 हजार से अधिक लोग घर छोड़ चुके हैं। 6 हजार मामले दर्ज किए गए हैं और 144 लोग गिरफ्तार किए गए हैं। राज्य में ३६ हजार सुरक्षाकर्मी और ४० आईपीएस अधिकारी तैनात हैं। पहाड़ी और घाटी जिलों में कुल 129 चौकियां हैं।