भविष्य युवाओं और टेक्नोलॉजी के लिए पूरी तरह तैयार है

भविष्य युवाओं और टेक्नोलॉजी के लिए पूरी तरह तैयार है

पैठण गांव महाराष्ट्र के औरंगाबाद से कुछ 50 किमी दूर होगा। जैसे ही आपनेयह नाम सुना होगा, ज्यादातर लोगों के मन में खूबसूरत पैठणी सिल्क साड़ी का खयाल आया होगा, जिसकी बॉर्डर पर सोने या चांदी के धागे से बहुत जटिल एम्ब्रॉयडरी होती है। आप गलत नहीं हैं, फिर भी इसमें एक और बात जोड़ दूं। यह महाराष्ट्र के महान संत एकनाथ की जन्मस्थली भी है। प्राचीन काल में ये जगह प्रतिष्ठान नाम से जानी जाती थी, जो कि सातवाहन राजवंश की राजधानी थी और उस समय व्यापार का प्रमुख केंद्र थी। हालांकि यह जगह अभी भी गांव की तरह लगती है, लेकिन यहां की माली हालत कई गांवों से काफी बेहतर है।

पिछले साल 18 दिसंबर को जब स्थानीय पुलिस 65 वर्षीय भीमराव और शशिकला खरनाल (60) के घर में घुसी तो उन्होंने अंदाजा लगा लिया कि लूट के दौरान उनसे गलती हो गई। वो इसलिए क्योंकि उनके आभूषण गायब थे और दोनों जमीन पर मृत पड़े हुए थे। जाहिर तौर पर आरोपियों ने उन्हें मौत के घाट उतार दिया था। केस की पड़ताल कर रही पुलिस को पड़ोसियों ने बताया कि उनकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी, घर में दाखिल होते हुए भी किसी को नहीं देखा और किसी भी अनजान चेहरों की पहचान के लिए वहां आसपास कोई सीसीटीवी नहीं थे। पुलिस अंधेरे में हाथ-पैर मार रही थी।

जैसा कि फिल्मों में होता है, किसी मर्डर केस की तरह फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट घटनास्थल पर आए और कुछ फिंगरप्रिंट जुटाए। आप अपने जानने वाले किसी भी पुलिसकर्मी से पूछिए कि फिंगर प्रिंट जुटाने के बाद क्या होता है। परिचितों और पड़ोसियों के फिंगरप्रिंट के मिलान और संदिग्ध फिंगरप्रिंट पता लगाने में बहुत समय जाता है। थोड़ा अजीब पाए जाने पर फिंगरप्रिंट्स को किसी ब्यूरो में भेजते हैं, जहां ढेरों पुलिस स्टेशन के कई मामले सालों से लंबित पड़े होते हैं। लेकिन उन्होंने इस मामले में ऐसा कुछ नहीं किया।

उन्होंने ऑटोमेटेड मल्टीमॉडल बायोमेट्रिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (एम्बिस) में छानबीन की, यह क्राइम सीन और गिरफ्तार हुए अपराधियों की पुतलियों के स्कैनिंग का डिजिटल डाटाबेस है, जो कि मई 2022 में लॉन्च हुआ। छह घंटों के अंदर एम्बिस ने सैयद आसिफ  नाम के एक शख्स से मिलान किया, जिसने अपराध कुबूल कर लिया। अगर यह केस एक संकेत है कि भविष्य इस तरह की टेक्नोलॉजी का होने वाला है, तो हाल ही में संपन्न हुआ वर्ल्ड कप चैस टूर्नामेंट युवाओं पर रोशनी डालता है। फाइनल तक पहुंचने वालों में सिर्फ 18 साल के रमेशबाबू प्रागननंदा ही नहीं थे, जो कि मैग्नस कार्लसन से हारे, बल्कि तीन और युवा सरीन, डी गुकेश और एरिगेसी भी आखिरी आठ तक पहुंचे थे। 20 साल से कम उम्र के टॉप 100 जूनियर्स की वैश्विक सूची में 21 खिलाड़ी भारत से हैं।

ऊपर जिन चार का जिक्र हुआ, वे टॉप 10 में हैं और 7 लोग टॉप 20 में हैं। याद रखिए कि प्राग को दुनिया की वरीयता सूची में 31वें स्थान मिला था और वह विश्व कप के फाइनल में पहुंचने वाले सबसे कम वरीयता प्राप्त खिलाड़ी बन गए हैं। फाइनल जीतकर विश्व चैंपियन बने कार्लसन ने युवाओं की सराहना की और बताया कि गुकेश के खिलाफ खेला गया मैच टूर्नामेंट में उनका सबसे अच्छा मैच था। कार्लसन ने एक इंटरव्यू में कहा कि मुझे लगता है कि भविष्य में चैस अच्छे हाथों में है। 94 के बीच कई लोग लंबे समय से इस गेम में हावी हैं और अब 2003 के बाद जन्मे ये युवा वही संकेत दे रहे हैं। शतरंज जैसा गेम खेलने के लिए ‘दिमाग से दानव’ (मेंटेलिटी में मॉन्सटर) होना पड़ता है और प्राग ऐसे ही लगते हैं, यहां तक कि कार्लसन भी यह मानते हैं।

विश्वनाथन आनंद के बाद 1990

फंडा यह है कि अगर कोई यह । उदाहरण देखे तो समझ आएगा कि जेनरेशन जी और टेक्नोलॉजी ही दुनिया पर राज करने वाली है और मेरा यकीन करें, दुनिया सुरक्षित हाथों में है।

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