हवेलियों पर हथौड़े…हैरिटेज को ठेंगा, निर्माण को सलाम… बिगड़ी सूरत, जिम्मेदार मौन

जयपुर. यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल राजधानी के परकोटा क्षेत्र में मनमानी के निर्माण खूब हो रहे हैं। इससे न सिर्फ हैरिटेज की दुर्दशा हो रही है बल्कि विरासत को सहेजे शहर की सूरत भी बिगड़ रही है। जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और अधिकारियों की मिलीभगत से ही यह सब काम हो रहा है। वरना एक समय वो भी था, जब परकोटे के मूलस्वरूप से कोई छेड़छाड़ करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता था।

150 से अधिक हो रहे नए निर्माण

परकोटा में 150 से अधिक नए निर्माण हो रहे है। जबकि, हैरिटेज निगम ने जीर्णोद्धार कराने के लिए बायलॉज बना रखे हैं, लेकिन इन नियमों की किसी को परवाह नहीं है। तभी तो एक के बाद एक हवेलियों को ध्वस्त कर नए निर्माण किए जा रहे हैं। जौहरी बाजार की प्रमुख गलियों से लेकर चांदपोल बाजार, चौड़ा रास्ता, रामगंज बाजार, घाटगेट बाजार और हवामहल बाजार में एक जैसा हाल दिखाई दिया।

मैं परकोटा: गलियों में आ गया बाजार

मैं ऐसा शहर हूं, जिसको जमीन पर उतारने से पहले कागज पर बनाया गया और उसी के अनुरूप मुझे बसाया गया। लेकिन, पिछले कुछ वर्षों से व्यावसायिक गतिविधि बढ़ी हैं। व्यावसायिक गतिविधियां बाजारों से बढ़कर गलियों में पहुंच रही हैं। ऐसे में जब ऐतिहासिक इमारतों को तोड़ा जाता है तो मुझे दर्द होता है। निजी फायदे के लिए धरोहर को नुकसान पहुंचाना फायदे की बात नहीं है। तीन सौ वर्ष पहले इनको बनाना आसान नहीं था। वैसे तो इन इमारतों की महत्ता बहुत है, लेकिन विश्व विरासत सूची में शामिल होने से और बढ़ गई है। हमारे वैभव को लौटाने के लिए सभी को एकजुट होना होगा, नहीं तो इतिहास समेटे शहर इतिहास बन जाएगा

ये जिम्मेदार

  • स्थानीय विधायक के अलावा, क्षेत्रीय पार्षद
  • हैरिटेज निगम आयुक्त, सतर्कता शाखा उपायुक्त, हवामहल-आमेर, किशनपोल और आदर्श नगर जोन उपायुक्त भी जिम्मेदार हैं।

ये हो रहा

  • निगरानी के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। सतर्कता शाखा के जवान तो गलियों में घूमते हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं होती।
  • यूनेस्को को दिखाने के लिए राज्य सरकार ने हैरिटेज सेल का गठन कर दिया। लेकिन, अब तक इसका गठन और उपयोगिता तय नहीं है।
  • @सौंथली का रास्ता

कोई भी नहीं रहा पीछे

  • विधायक और पार्षद अवैध निर्माण रुकवाने के लिए एक बार भी आगे नहीं आए। राजनीतिक लाभ लेने के लिए जरूर एक-दो बार धरना दिया।
  • सतर्कता शाखा से लेकर जोन के अधिकारी भी अवैध निर्माणों को रोकने में नाकाम रहे। कभी राजनीतिक दबाव के कारण पुराने निर्माण तोड़ नए बनाए गए तो कभी अधिकारियों ने अपने स्तर पर ही बनवा दिए।