जिसकी ज्ञान व विज्ञान में प्रीति है, जो ज्ञान को विज्ञान के जरिए सिद्ध कर दे, वह है भारत मोरारी बापू

जिसकी ज्ञान व विज्ञान में प्रीति है, जो ज्ञान को विज्ञान के जरिए सिद्ध कर दे, वह है भारत मोरारी बापू

आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में दिल्ली के मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में आयोजित रामकथा में मोरारी बापू ने कहा कि जिसकी ज्ञान व विज्ञान में प्रीति है और ज्ञान को विज्ञान के द्वारा सिद्ध करके जगत को परिणाम दिखा दे, वो भारत है। जो ज्ञानरत है वो भारत है। बापू ने इस कथा का नाम दिया है- ‘मानस भारत’। इंडिया गेट स्थित समर स्मारक के सामने बने कथा पंडाल को तिरंगे रंग का बनाया गया है। मानस भारत कहकर न ही मानस और न ही भारत को सीमित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत एक वैश्विक संज्ञा है। भारत को पारिभाषित करते हुए उन्होंने कहा कि भा- नभ, र पृथ्वी और त-पाताल वाचक है। इस तरह जिसने आकाश, धरती से लेकर पाताल तक तीनों भुवनों को को अपनी विचारधारा, संस्कार, ईमानदारी और समर्पण से खोज रखा है, वह भारत है। बापू ने जी-20 की 1. सफलता के लिए देश को बधाई देते हुए

‘हम आज जो भी वैज्ञानिक खोज कर रहे हैं, उनका मूल हमें किसी न किसी भारतीय शास्त्र में मिलता है….

चंद्रयान-3 की सफलता की चर्चा करते हुए बापू ने इसरो चेयरमैन सोमनाथ के उस बयान का जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा है कि ‘हम आज जो भी वैज्ञानिक खोज कर रहे हैं, उनका मूल हमें किसी न किसी भारतीय शास्त्र में मिलता है। इसलिए मैं विद्वानों को बुलाकर वेदों के खंडों की तलाश करवाता हूं, खुद दर्शन शास्त्र उठाता हूं।’