चीन सीमा तक ‘वंदे भारत’

ज्यादातर की डेडलाइन दिसंबर 2024, काम होते ही ट्रेन चीन से 10 किमी पहले तक पहुंचेगी

चीन से बॉर्डर कनेक्टिविटी को लेकर मिल रही चुनौतियों के बीच एक अच्छी खबर है। भारत के ईस्टर्न सेक्टर में सिक्किम, भूटान, बांग्लादेश और म्यांमार तक करीब डेढ़ लाख करोड़ रु. में बिछाए जा रहे 5 रेल ट्रैक का काम 65% तक पूरा हो गया है। रेलवे के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि सब ठीक रहा तो दिसंबर 2024 तक सिक्किम के रंग्पो से गंगटोक तक वंदे भारत एक्सप्रेस शुरू हो जाएगी। बाद में इसी ट्रेन को नाथू ला तक ले जाना है। नाथू ला रूट का सर्वे जल्द शुरू हो रहा है। इसका क्लीयरेंस वर्क अंतिम चरण में है। रंग्पो-गंगटोक ट्रैक सेवक, रियांग, मेली स्टेशन बन चुके हैं। तीस्ता बाजार में भूमिगत स्टेशन बनना है। इसके अलावा त्रिपुरा को बांग्लादेश और असम को भूटान से जोड़ने वाले दो इंटरनेशनल क्रॉस बॉर्डर रेल रूट का काम भी अंतिम चरण में है। तीन और रेल प्रोजेक्ट हैं, जो भारत को सुपरफास्ट कनेक्टिविटी से चीन के नजदीक ले जाएंगे। रेल अधिकारियों के मुताबिक अभी फोकस सिक्किम और भूटान के रेल प्रोजेक् पर है। यहां दिन-रात काम हो रहा है।

  •  सिक्किम में देश का सबसे अहम रेल प्रोजेक्ट

 सिक्किम में देश का सबसे अहम रेल प्रोजेक्ट 14 में से 7 टनल बनीं; 120 की रफ्तार वाला ट्रैक बन रहा…पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सब्यसाची डे ने भास्कर को बताया कि सिक्किम का सेवक-रंग्पो सबसे अहम रेल प्रोजेक्ट है। 45 किमी लंबे ट्रैक पर 14 में से 7 टनल बन चुकी हैं। अब तक 60% भौतिक काम हो चुका है। तेज इलेक्ट्रिक लाइन बिछ रही है, ताकि ट्रेन 100 से 120 की गति से चल सके। ट्रैक को तिब्बत में चीन की यादोंग काउंटी और सिक्किम व पश्चिम बंगाल के बीच हिमालयन दोंग्क्या रेंज में नाथू ला दर्रे तक बढ़ाया जाएगा।

गंगटोक के समीप टनल नंबर 3 का काम चल रहा है। जनवरी 2024 तक टनल खनन पूरा होना है। बाकी टनल सितंबर 2024 तक पूरी हो जाएंगी।

भारत-भूटान: चीन सड़क जोड़ रहा, हम ट्रेन पहुंचा रहे

 • चीन-भूटान के बीच 477 किमी लंबी सीमा है। अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए चीन ने फारी को ट्रेमो ला नामक एक गुप्त सड़क भूटान से जोड़ी है।

• यहां भारत 48 किमी लंबा रंगिया-दरंग-सम्दुप जोंग्खार रेल ट्रैक बिछा रहा है। काम अंतिम चरण में है। रंगिया-दरंग असम तो सम्द्रुप जोंग्खार भूटान में है

•असम के कोकराझाड़ से भूटान के गेलेफू तक दिसंबर 2024 तक रेल चलनी है। ये 58 किमी का ट्रैक है। सुरंगों का आधा काम हो चुका है। काम पूरा होते ही रेल कनेक्टिविटी चीन बॉर्डर से 10 किमी पहले तक हो जाएगी।

पॉजिटिव पहलू रंग्पो-गंगटोक रूट पर महानंदा वन्यजीव अभयारण्य है, जो हाथियों का घर है। ट्रेन से हाथियों को बचाने के लिए पूरे जंगल रूट पर
विशेष सेंसर लगाए जा रहे हैं। हाथियों के झुंड की आहट मिलते ही
सेंसर ट्रेन तक सिग्नल भेजेंगे। फिर ड्राइवर ट्रेन 10-20 किमी / घंटे
की रफ्तार से चलाएंगे, ताकि झुंड दिखते ही ट्रेन रोक सकें।